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SESSION ON MANGERIAL TECHNIQUES IN BHAGVAT GITA

Lucknow Public College of Professional Studies (LPCPS) organized a session on the topic of "Managerial Techniques in the Bhagavad Gita." The session featured an informative lecture by Dr. Suman K. S. from Tripura University. Dr. Suman K. S. explored the Bhagavad Gita, a revered Hindu scripture, and its relevance to modern management practices. The lecture highlighted key principles and philosophies from the Gita and their application in contemporary business and organizational contexts. The session covered themes such as:

  • Leadership: The qualities of an effective leader, drawing parallels from the character of Krishna.
  • Decision-making: Insights on making ethical and strategic decisions, even in challenging situations.
  • Motivation and Performance: The Gita's teachings on self-motivation, focus, and achieving excellence in one's work.
  • Stress Management: How the Gita's wisdom can help managers and employees navigate workplace stress and maintain equanimity.
  • Work Ethics: The importance of duty, integrity, and selfless service in the professional sphere.

The lecture aimed to provide students and faculty with a new perspective on management, demonstrating how ancient wisdom can offer valuable insights into modern managerial challenges. The session was interactive, with Dr. Suman K. S. engaging with the audience and answering questions. The session was well-received, providing attendees with a deeper understanding of the Bhagavad Gita and its practical applications in the field of management.

लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ़ प्रोफेशनल स्टडीज़ (LPCPS) ने "भगवद गीता में प्रबंधकीय तकनीक" विषय पर एक सत्र आयोजित किया। इस सत्र में त्रिपुरा विश्वविद्यालय से डॉ. सुमन के.एस. द्वारा एक जानकारीपूर्ण व्याख्यान दिया गया। डॉ. सुमन के.एस. ने भगवद गीता, एक प्रतिष्ठित हिंदू धर्मग्रंथ, और आधुनिक प्रबंधन प्रथाओं के लिए इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा की। व्याख्यान में गीता के प्रमुख सिद्धांतों और दर्शन तथा समकालीन व्यवसाय और संगठनात्मक संदर्भों में उनके अनुप्रयोग पर प्रकाश डाला गया। सत्र में निम्नलिखित विषयों को शामिल किया गया:

नेतृत्व: एक प्रभावी नेता के गुण, कृष्ण के चरित्र से समानताएँ दर्शाते हुए।

निर्णय लेना: चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी नैतिक और रणनीतिक निर्णय लेने की अंतर्दृष्टि।

प्रेरणा और प्रदर्शन: आत्म-प्रेरणा, ध्यान केंद्रित करने और अपने काम में उत्कृष्टता प्राप्त करने पर गीता की शिक्षाएँ।

तनाव प्रबंधन: गीता का ज्ञान प्रबंधकों और कर्मचारियों को कार्यस्थल के तनाव से निपटने और संतुलन बनाए रखने में कैसे मदद कर सकता है।

कार्य नैतिकता: पेशेवर क्षेत्र में कर्तव्य, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा का महत्व।

व्याख्यान का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को प्रबंधन पर एक नया दृष्टिकोण प्रदान करना था, जिसमें दिखाया गया कि कैसे प्राचीन ज्ञान आधुनिक प्रबंधकीय चुनौतियों में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है। सत्र संवादात्मक था, जिसमें डॉ. सुमन के.एस. ने दर्शकों के साथ बातचीत की और सवालों के जवाब दिए। सत्र को अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जिससे उपस्थित लोगों को भगवद गीता और प्रबंधन के क्षेत्र में इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों की गहरी समझ मिली।